प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर निबंध |Essay on Foreign Direct Investment

FDI par nibandh

भूमिका

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश या फॉरन डाइरेक्ट इन्वेस्टमेंट आज मीडिया और राजनीतिक क्षेत्र में बहुत चर्चा का विषय बन गया है । आखिर फॉरन डाइरेक्ट इन्वेस्टमेंट है क्या ? इसका स्पष्टीकरण करने को न तो कोई राजनेता तैयार है और न जनता के पास इसकी समझ है कि भारत के आर्थिक क्षेत्र में विदेश का हस्तक्षेप उचित है अथवा अनुचित । डॉक्टर मनमोहन सिंह की सरकार में एफ० डी० आई० की पहल विपक्ष के गलिया में विवाद का विषय रही है । मीडिया की इसके विषय में कुछ अलग ही राग रहा ।

मीडिया जो समाज को मार्गदर्शन का कार्य करती है , वह जनता को गुमराह करने में लगी रही । एफ० डी० आई० कोरा बहस का मुद्दा बनी रही । जनता के समक्ष इसकी सच्चाई व्यक्त करने से राजनेता और मीडिया दोनों कतराते रहे । आज भी भारत की आम जनता एफ० डी० आई० के विषय में परिचित नहीं हो पाई है ।

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FDI क्या है?

एफ० डी० आई० का अर्थ है अपने देश की बाजार में विदेशी व्यापारियों द्वारा अपना धन निवेश करना , चाहे वह अपने उत्पाद के रूप में हो या भारत में अपना उत्पाद तैयार करना अथवा भारत की मुर्दा पड़ी कम्पनियों में अपना धन निवेश कर उसे सुचारू रूप से संचालित करना । विदेश कम्पनियाँ भी दूसरे देशों में कम्पनियाँ चलाने के लिए इस लिए तैयार हो जाती हैं कि उन्हें अपने देश की अपेक्षा दूसरे देशों में खास कर भारत जैसे देश में बहुत सस्ते दर पर मजदूर और संसाधन उपलब्ध हो जाते हैं और भारत जैसे देश दूसरे देश से अपने देश के विकास के लिए धन प्राप्त कर लेते हैं । इसी बहाने देश में नवीन अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध हो जाती है साथ ही रोजगार के नये अवसर और सीखने और अनुभव करने के अवसर प्राप्त हो जाते हैं । FDI par nibandh

एफ० डी० आई० पोर्टफोलियो निवेश के विरुद्ध है जहाँ निवेशकर्ता प्रबन्धन में बहुत परेशान कर दिया जाता है । विदेशी सीधे निवेशकर्ता किसी भी व्यापारिक संस्थान में मताधिकार भी प्राप्त का सकता है । इस प्रकार सीधे निवेश में वह हर प्रकार से सुरक्षित रहता है । वह पूरी कम्पनी या इसके समस्त सहायकों को अधिग्रहण कर सकता है , किसी संयुक्त व्यापारिक संस्थान के पूरे हिस्से को अधिग्रहण कर सकता है और उसे उससे असम्बद्ध व्यापारिक संस्थान में समाहित कर सकता है । वह किसी व्यापारिक जोखिम उठाने में भी सम्मिलित हो सकता है । इस प्रकार विदेशी निवेशकर्ता का हित पूरी तरह से सुरक्षित रहता है ।

विश्व स्तर पर FDI

जहाँ तक एफ० डी० आई० का सवाल विश्व पर है , संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व का सबसे बड़ा एफ० डी० आई० का प्राप्तकर्ता है जहाँ 194 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ है । दूसरे स्थान पर चीन है जहाँ 85 बिलियन डॉलर का निवेश दूसरे देशों द्वारा हुआ है । भारत में विदेशी निवेश की शुरुआत 1990 में हुई जब भारत में सबसे कम निवेश एक विलियन डॉलर से भी कम हुआ । सन् 2010 से 2012 के बीच भारत में विभिन्न क्षेत्रों में , जैसे – सेवा , दूर संचार , निर्माणकार्य के क्षेत्र में एवं कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्ड वेयर के क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से विदेशी निवेश हुआ और भारत ने चीन के बाद तीसरा स्थान प्राप्त कर लिया ।

भारत में सन् 2010 में जहाँ 44.8 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ था वहीं सन् 2012 में सन् 2010 की अपेक्षा आठ गुना अधिक विदेशी निवेश प्राप्त किया । सन् 2012 में भारत सरकार फॉरन इक्सचेंज मैनेजमेंट ऐक्ट के अन्तर्गत 49 प्रतिशत विदेशी निवेश उड्डयन के क्षेत्र में 74 प्रतिशत प्रसारण के क्षेत्र में लगभग 51 प्रतिशत मल्टी ब्रेण्ड रिटेल के क्षेत्र में और 100 प्रतिशत विदेशी निवेश सिंगल ब्रेण्ड रिटेल के क्षेत्र में एफ० डी० आई० की अनुमति प्रदान किया । किन्तु एफ० डी० आई० के चुनाव की स्वतंत्रता राज्यों को प्रदान किया । यदि राज्य चाहें तो वहाँ एफ० डी० आई० लागू करें या न करें ।

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FDI से लाभ

यह निर्विवाद तथ्य है कि एफ० डी० आई० से भारत की अर्थ व्यवस्था सुदृढ़ हुई है । मौजूदा दशक की स्थिति यदि इसके पूर्व के दशक की स्थिति से तुलना की जाये तो भारत के आम नागरिक की आर्थिक स्थिति में बहुत अन्तर आया है । अब तक भारत में प्रत्येक गलियों में मनुष्य की आवश्यकता की फुटकर की दुकानें थीं जिससे जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग अपने रोजमर्रा की जरूरतों के अनुसार सामान खरीदता था । एफ० डी० आई० के भारत में लागू हो जाने से स्थिति में बहुत सुधार आया है । अब नागरिक अपनी सुविधा और आवश्यकता रोजमर्रा की वस्तुएँ विदेशी निवेशित संस्थानों या रिटेलशॉप से एक ही छत के नीचे प्राप्त कर लेता है ।

भारत में एफ० डी० आई० के आ जाने से जहाँ गली के फुटकर विक्रेता अपने व्यापारिक गतिविधियों के लिए भयभीत हैं , वहीं क्रेता एफ० डी० आई० के आ जाने से प्रसन्न हैं कि वे अपनी आवश्यकता के अनुसार अपनी पसंद की वस्तुओं की गुणवत्ता को अच्छी तरह जाँच परख कर पूर्णरूप से संतुष्ट होकर उचित मूल्य पर प्राप्त कर लेते हैं । अर्थशास्त्रियों के मत के अनुसार एफ० डी० आई० अर्थ जगत में मुद्रा का एक प्रवाह है । भारत के बाजार में फुटकर बाजार पूरी तरह से असंगठित है और कुछ लोग किसानों के उत्पाद पर अपना एकल अधिकार स्थापित कर लिए हैं । यही कारण है कि किसान अल्पतम लाभ प्राप्त करता है । FDI par nibandh

प्रतिबंधित क्षेत्र

एफ० डी० आई० फुटकर क्षेत्र में किसानों के उत्पाद का बाजार में मांग के अनुसार उचित मूल्य प्रदान कर उन्हें लाभान्वित कर सकता है । भारत सरकार एफ० डी० आई० को सभी क्षेत्रों में लागू नहीं किया है । कुछ क्षेत्रों को एफ० डी० आई० से दूर रखा है । वे क्षेत्र हैं – चिटफण्ड के व्यापार , निधि कम्पनी , कृषि और वृक्षारोपण सम्बन्धी क्रिया – कलाप , रियलस्टेट के व्यापार , फार्म हाउस निर्माण या विकास के आदान – प्रदान के व्यापार , लॉटरी का व्यापार चाहे वह सरकारी लॉटरी हो या व्यक्तिगत या ऑनलाइन लॉटरी हो , जूआ और कैसीनों आदि का व्यापार , सिगार , चुस्ट , सिगरेट बनाने व बेचने के व्यापार आदि । एटामिक एनर्जी , रेलवे परिवहन को भी देश के लाभ के लिए एफ० डी० आई० से सुरक्षित रखा है ।

FDI से हानि

एफ० डी० आई० से हानि तभी है जब आर्थिक रूप से सशक्त निवेशक प्रतिद्वंद्वी व्यापारिक संस्थानों पर अपना एकल आधिपत्य स्थापित कर अपनी मनमानी करने लगे । वे अपने मनचाहे दामों पर वस्तुओं का क्रय – विक्रय करना शुरू कर दें । इस दोष से बचने के लिए एफ० डी० आई० के उचित नितियों और नियमों का पालन आवश्यक है इससे इस प्रकार के एकल आधिपत्य से बचा जा सकता है । देश की सत्ता को भी विदेशियों के हाथों का खिलौना नहीं बनना चाहिए ।

उपसंहार

भारत का श्रम कानून उलझी कानूनी प्रक्रिया और शासन व राजनीतिज्ञों में व्याप्त भ्रष्टाचार विदेशी निवेशकों को यहाँ आने में पर्याप्त बाधक हैं । इन सब कारणों से भारत की स्थिति विश्व के पटल पर पाकिस्तान , बंगला देश और श्रीलंका से भी नीचे है ।

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